Vivratidarpan.com- साक्षी ने छुट्टियों में बहुत क्लासेज शुरू कर दी थी। उसे अपनी सारी फ्रेंड्स के साथ मिलकर डांस गाना सीखना था। सुबह वो जिम्नास्टिक में जाने लगी
दोपहर में स्विमिंग में जाने लगी । शाम को वह स्कूल में बास्केट बॉल खेलने जाने लगी। इस तरह वो पूरे दिन ही बहुत मेहनत करने लगी।
और उसकी कड़ी मेहनत रंग लाई वह स्कूल में बास्केट बॉल की कैप्टन बन गई। स्कूल खुलते ही वह स्कूल में सभी प्रतियोगिता में शामिल होने लगी। गाने में डांस में खेल में प्रथम पुरस्कार जीत लिए। उसकी एक सहेली माही ने जो उसकी पक्की सहेली थी उसे अब साक्षी को देख कर बहुत ईर्ष्या हो ने लगी। उसने बास्केट बॉल खेलने के समय साक्षी को धक्का दिया और बुरी तरह से हाथ के बल साक्षी को गिरा दिया। साक्षी को डॉक्टर के पास ले जाया गया। उसके हाथ में फ्रेक्चर हो गया था। साक्षी को राइट हाथ में चोट लग गई थी। बेहद दुखी ओर निराश हो गई। अब वो कुछ भी करने में असमर्थ थी
माही अब अकेले ही स्कूल में जाती सभी जगह उसे साक्षी की बहुत याद आती रहती थी। उसे अब अपने किए पर पछतावा हो ने लगा और फिर वो साक्षी के साथ उसके घर में उसकी हर काम में मदद करने लगी
जब तक साक्षी पूरी तरह से ठीक नहीं हो गई तब तक वो साक्षी के साथ रही, माही अब साक्षी की असली में पक्की सहेली बन चुकी थी। साक्षी ने भी माही को साथ लेकर स्कूल में हमेशा हर प्रतियोगिता में साथ रखा जब इस तरह दोनों को बहुत सारे बड़े-बड़े पुरस्कार मिले। तब माही के मन में ईर्ष्या की जगह ख़ुशी के आंसू बहने लगे। साक्षी ने उसे गले से लगा लिया।
-जया भराड़े बड़ोदकर, टाटा सीरी न। टावर १A। ठाणे मुंबई, महाराष्ट्र
