दीवाली की रेल पेल, सड़कों पे लगी सेल,
सारा इंतजाम फेल, मेरे प्यारे दून का ।
चीन के पटाखे रखे, लड़ियाँ धमाके रखे,
उठता जनाजा दिखे, देश के कानून का ।।
बूढ़ी टोकरे को लिए, संग छोकरे को लिए,
बेचने आयी है दीये, घूट भरे खून का ।
जोर से देती आवाज, पर्व की बचाओ लाज,
कर दो जुगाड़ मेरे, दाल भात चून का ।।
- जसवीर सिंह हलधर, देहरादून
