जरा थमना अभी चंदा,
तनिक श्रृंगार है बाकी,
मिलन था बस क्षणिक भर का,
अभी अभिसार है बाकी,
मधुर मनभावनी बेला
अजी कब लौट कर आये।
ठहर जा चन्द्रमा प्रिय प्रेम
का सत्कार है बाकी ।
कहो प्रियवर तुम्हारे बिन
करूँ श्रृंगार अब कैसे ।
नहीं जब पास तुम तो चौथ
व्रत लूँ धार अब कैसे ।
खड़े तुम राष्ट्र रक्षा में
बहुत ही दूर सीमा पे ।
करूँ ओ बालमा हिय के
प्रकट उदगार अब कैसे ।
– सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर
