पधारों द्वारे गणेशा मेरे,
पुकारू तुझे दिल से देवा मेरे।
करू आरती देव दीपक जला,
गजानन तुम्ही विघ्नहर्ता मेरे।
पिरोती हूं फूलों की माला को जब,
गली द्वारा घर सब जो महका मेरे।
झुकाऊं जो सर जोड़कर हाथ को,
ले खुशियों भरा घर ये चहका मेरे।
चरण को नमन ज्योटी करती अरज,
सदा रखना सर पे जो साया मेरे।
– ज्योति श्रीवास्तव, नोएडा, उत्तर प्रदेश
