गजल – विनोद निराश

 

आँख का आँसू लहू बन के बह गया,

ख्याले-इश्क़ ख्वाब बन के दह गया।

 

इक तेरे जुदा होने के रंजो-गम में,

मासूम सा दिल ये तन्हा रह गया।

 

तन्हा दिल मेरा उसपे तेरी बेरुखी,

सोचो दिल कैसे हादशा सह गया?

 

जानते है इश्क़ है ला-इलाज़ बीमारी,

देख बीमारे-इश्क़ ज़माना कह गया।

 

आई जो गमों की बाढ़ क्या किजिये,

निराश ख्वाहिशों का महल ढह गया।

– विनोद निराश, देहरादून

ख्याले-इश्क़ – प्रेम का विचार

ख्वाब – स्वप्न्न

दह – गिरना / गहराई / जलन / नदी का बहुत गहरा भाग

रंजो-गम – दुःख / सोच / चिंता / मानसिक कष्ट

तन्हा – अकेला / एकाकी

ला-इलाज़ – जिसका उपचार न हो / अचिकित्स्य / असाध्य

बीमारे-इश्क़ – प्यार का मरीज़ / प्रणय रोगी / प्रेम का बीमार व्यक्ति / गहरा प्यार

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