आँख का आँसू लहू बन के बह गया,
ख्याले-इश्क़ ख्वाब बन के दह गया।
इक तेरे जुदा होने के रंजो-गम में,
मासूम सा दिल ये तन्हा रह गया।
तन्हा दिल मेरा उसपे तेरी बेरुखी,
सोचो दिल कैसे हादशा सह गया?
जानते है इश्क़ है ला-इलाज़ बीमारी,
देख बीमारे-इश्क़ ज़माना कह गया।
आई जो गमों की बाढ़ क्या किजिये,
निराश ख्वाहिशों का महल ढह गया।
– विनोद निराश, देहरादून
ख्याले-इश्क़ – प्रेम का विचार
ख्वाब – स्वप्न्न
दह – गिरना / गहराई / जलन / नदी का बहुत गहरा भाग
रंजो-गम – दुःख / सोच / चिंता / मानसिक कष्ट
तन्हा – अकेला / एकाकी
ला-इलाज़ – जिसका उपचार न हो / अचिकित्स्य / असाध्य
बीमारे-इश्क़ – प्यार का मरीज़ / प्रणय रोगी / प्रेम का बीमार व्यक्ति / गहरा प्यार
