छलक आवेला आंखन आंसू बेवफा तोहार मुस्काइल बा कातिल।
कुछउ भावे ना आंखी के आगे बेदर्दी तोहार शर्माइल बा कातिल।
तू सतावा जेतना केवनो बात ना हम कइली गुहार गुनाह हो गइल ।
नजर के बाण भइल घायल दिल मरहम तोहार लगाईल बा कातिल।
सुनर रूप बा नाजुक बदन कमल के डार जस लचके पतरी कमर।
फेरा नजर ओहर ढेर घायल गिरे केस तोहार लहराइल बा कातिल।
महके पवन संग ले के तन खुशबू तोहार खूब बगिया गम ग़माइल।
मिसरी से मीठ बोली रस घोले दिल भारती महकाइल बा कातिल।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर), बोकारो, झारखंड, मॉब.9955509286
