झुलसे दिल पर नमक का मलहम लगाया आपने,
दोस्ती के नाम पर ख़ंजर चलाया आपने।
कभी मेरे भी हृदय में धड़कनों का राग था,
रागनी को छीनकर मुझे बुत बनाया आपने।
ख्वाब देखे थे रूपहले चाँद के व चाँदनी के,
किन्तु रातों में मेरे सूरज उगाया आपने।
दफ़न करके स्वयं को मैं चैन से सोई हुई थी,
कब्र पर आकर मेरी क्यों फिर जगाया आपने।
मोहब्बत बदनाम न हो दुनिया वालों की नजर में,
छिपाना चाहा तो क्यों परदा उठाया आपने।
-नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश
