ख्वाब उसका नहीं फलता – गुरुदीन वर्मा

 

अंत में होता यही है, ख्वाब उसका नहीं फलता।

बेटी होती है पराई, हक उसको नहीं मिलता।।

अंत में होता यही है——————।।

 

आँखों का तारा थी तू तो, इकलौती वारिस थी तू।

घर का चिराग तू ही थी, ख्वाबो-ख्वाहिश भी थी तू ।।

डोली में जाती है एक दिन, साथ कोई नहीं चलता।

अंत में होता यही है——————–।।

 

संग फूलों के मचलना, मुझको देखकर इतराना।

सखियों संग वो ठहाके, जिद बाबुल से करना।।

मुझ सी आजादी नहीं क्यों, पिंजरा हाँ नहीं खुलता।

अंत में होता यही है——————–।।

 

सबको रखना है तुमको खुश, तेरा दर्द जाने नहीं कोई।

तुमको हर सितम सहना है, तेरी आवाज़ नहीं कोई।।

दिल में रह जाते हैं अरमां, दीपक उसका नहीं जलता।

अंत में होता यही है——————–।।

– गुरुदीन वर्मा आज़ाद

तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)

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