कैसे करुं शब्दों में बयां,
तुम तो मेरी जीवन हो माँ
मुझको दिया जीवन तुमने
जी सकूँ इस योग्य बनाया तुमने
कैसे कहूँ शुक्रिया माँ!
जब भी भींगती है पलके मेरी
आँचल का कोना दिया तुमने
दुनिया के गर्म थपेड़ों में
एक शीतल छाव हो माँ
कैसे करूँ शब्दों में बयां
तुम तो मेरी सांस हो माँ!
माँ-बेटी का पावन रिश्ता
कैसे कोई बयां कर
जब भी चोट मुझे लगती है
दर्द तुम्हे ज़्यादा होती है
कैसे करूँ शब्दों में बयां
तुम तो मेरी आस हो माँ!
मुझमें जो कुछ अच्छा
सब दिया हुआ तुम्हारा है
पापा के न रहने पर
तुममे ही तो दिखते पापा
कैसे करूँ शब्दों में बयां
तुम तो मेरी दोनों हो माँ!
मैं रहूं न रहूं
एक अक्स तो छोड़ जाऊंगी ही
जिसमे दिखे तुम्हारा चेहरा
वो आईना छोड़ जाऊंगी!
शुक्रिया शब्द छोटा कितना
तुम्हारा प्यार इतना फैला है
बस माफ करना माँ मुझको
हो गई हो कोई भूल मुझसे!
– राधा शैलेन्द्र, भागलपुर, बिहार
