शीशे की तरह साफ।
किरदार है हमारा।।
तुम फिर भी ना समझ पाए।
तो क्या दोष है तुम्हारा।।
हम तो बस साफ-साफ बोलते हैं।
ना किसी के मन और दिल में जहर घोलते हैं।।
कोई समझे तो समझे हमें।
और ना समझे तो गर्दिश में है सितारा हमारा।।
शीशे की तरह साफ है किरदार हमारा।
सबको अपना मानकर चलता हु।
मन में किसी से प्यार ना रखता हूं।।
गुस्सा झगड़ा बस कुछ देर का होता है।
पर अपनों के बिना का गुजारा होता है।।
हमें लोग समझते नहीं तो इसमें मेरी क्या गलती है।
सम्मान स्वाभिमान से जीना स्वभाव है हमारा।।
शीशे की तरह साफ किरदार है हमारा।
– राजेश कुमार झा, बिना, मध्य प्रदेश
