(शेर)- भरी महफ़िल में हमसे कहते हैं कि, ऊपर वाले से डरो।
हम भी तो यही कहते हैं कि, कुछ तो शर्म तुम भी करो।।
क्यों है आपकी सेटिंग, कहीं कमीशन तो कहीं सुंदरी से।
अपने इस नकली चोले से, मत भगवान को बदनाम करो।।
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हर गली-शहर-गाँव, मचा यही बवाल है।
बोलो,बोलो,बोलो, कितने करोड़ का सवाल है।।
एक करोड़, दो करोड़, सात करोड़ या कई करोड़।
हर गली-शहर-गाँव——————-।।
मेरी हस्ती पे सवाल, इतने क्यों उठाते हो।
कैसे हुए हो करोड़पति, क्यों नहीं बताते हो।।
झौपड़ी को महल कैसे, आपने बना दिया।
हर तरफ है चर्चा, आप कैसे मालामाल है।।
हर गली-शहर-गाँव——————-।।
महंगाई-बेरोजगारी से, यह वतन त्रस्त है।
कमीशन के लालच में, हर विभाग भ्रष्ट है।।
अन्याय- नाइंसाफी से, मर रहा बेकसूर है।
दबंगों और लूटेरों का, क्यों मकड़जाल है।।
हर गली-शहर-गाँव——————-।।
बेईमान-चरित्रहीन, हमें नैतिकता सिखाते हैं।
अपने पापों का सबूत, चालाकी से मिटाते हैं।।
संगीन जुर्म और खून से, जिनके हाथ रंगीन है।
साम्राज्य और सम्मान उनका, ऐसे क्यों विशाल है।।
हर गली-शहर-गाँव—————–।।
– गुरुदीन वर्मा आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)
