कविता – वैशाली रस्तोगी

गर्म चाय, एक मीठा सा अहसास,

जीवन की ठंडक में एक गर्मी का वास।

धुएं की खुशबू, कप में उठती भाप,

मन को सुकाती, दिल को देती छाप।

पत्तियों का रिश्ता, पानी की गहराई,

स्वाद में डूबी, एक अद्भुत मिठास आई।

चुस्कियों के साथ, बातें जो होती हैं,

साथ बैठे लोगों की, दिल की होती हैं।

गर्म चाय, सर्दियों की साथी है,

एकांत में भी, दिल की बाती है।

मीठे सपने, गरम खुशबूदार हवा,

जीवन के हर पल को, बना देती हैं गवा।

चाय की चुस्की, समय को रोक दे,

एक पल के लिए, सब कुछ भूल दे।

जीवन की भागदौड़ में, एक ठहराव,

गर्म चाय, दिल को देती है एक भाव।

वैशाली रस्तोगी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश

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