करो तुम काम वो ही, होवे तारीफ हाँ जिसकी।
खुशी तुमको भी मिले, खुशी जिसमें हो सबकी।।
करो तुम काम वो ही———————।।
बहुत है काम यूँ तो, मिलता है फल उनमें भी।
करते हैं खुश वो भी, होता है नाम उनसे भी।।
बुनो तुम ख्वाब वो ही, होवे तारीफ हाँ जिसकी।
नसीब तुम्हारा भी सँवरे, चमके किस्मत सबकी।।
करो तुम काम वो ही——————-।।
राह जो तुम चले हो, उसकी मंजिल समझो।
अपना मतलब ही नहीं, मतलब हरदिल समझो।।
देखो मंजिल वो ही, होवे तारीफ हाँ जिसकी।
नाम तुमको भी मिले, बने रफ़त वो सबकी।।
करो तुम काम वो ही——————-।।
तुम्हारे हाथों में ही है, होगा वतन कैसा कल।
भूलों नहीं कर्ज इसका, करो नहीं पैदा मुश्किल।।
करो रचना तुम वो ही, बनें तस्वीर हाँ इसकी।
दुहा तुमको भी मिले, उन्नति हो वतन की।।
करो तुम काम वो ही——————-।।
– गुरुदीन वर्मा आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)
