कड़वा सच – ऋतुबाला रस्तोगी

एक पूरी कौम जिसका, काम दहशत और हत्या।

एक ऐसी नस्ल जिसकी, सोच नफरत और हत्या।

 

है फरेबी नाम बदले, हर घड़ी बदले ठिकाना।

सीखती है बचपने से,कर मुहब्बत है फँसाना।

एक पीढ़ी लक्ष्य जिसका, झूठ फितरत और हत्या।

हूर की खातिर लडेंगे, इश्क को बाज़ार देंगे।

गर मिले जन्नत इन्हें तो, खुद मरेंगे मार देंगे।

एक मजहब की रही है, लूट आदत और हत्या।

 

ये पढ़ें अनपढ़ रहें या, ढूँढते अपना निशाना।

है महज आतंक मकसद, और आतंकी बनाना।

एक पुश्तैनी इरादा, खौफ वहशत और हत्या।

-ऋतुबाला रस्तोगी, चाँदपुर, बिजनौर, उत्तर प्रदेश

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *