टूट गया विश्वास मेरा
भ्रम सभी जाता रहा
माँ कभी मर नही सकती
मुट्ठी से फ़िसलती रेत की तरह
माँ चली गयी दूर, बहुत दूर मुझसे!
जानती हूँ अब मुझसे कोई नही पूछेगा
क्या खाओगी बेटी
क्यूँ परेशान हो बेटी
तुम्हारी आवाज़, क्यूँ उदास सी है बेटी
माँ चली गयी
दूर बहुत ही दूर मुझसे!
ज़िन्दगी भर जिसने थाम कर हाथ मेरा
मुझे जीना सिखाया
मुश्किल घड़ी में भी
हँसना सिखाया
धूप का साया न पड़े मुझ पर
ये सोचकर आँचल का साया में छिपाया मुझको
वो माँ चली गयी!
जानती हूँ अब गीले तकियों की सिसकियाँ
यूँ ही सूख जाएगी
कोई नहीं पूछेगा बेटी
क्यूँ परेशान हो तुम!
पर माँ कहीं जाती नही
माँ कभी जाती नही
हर घड़ी दुआ बनकर
बच्चो के लिए काला टीका बनकर
माँ रहती है हमारे ही समीप!
क्योंकि माँ शब्द नही सृष्टि है
माँ इस जहान की सबसे अजीम हस्ती है
माँ प्यार है जज्बात है
माँ इस धड़कते दिल की एहसास है
माँ है तो इंतज़ार है
माँ मेरे होने का प्रमाण हैं!
राधा शैलेन्द्र, भागलपुर, बिहार
