एक डिजिटल दौर की त्रासदी – डॉ सत्यवान सौरभ

 

घर की बात थी, घर में रहती,

अब कैमरे के आगे बहती।

झगड़े भी अब स्क्रिप्ट हुए हैं,

रिश्ते जैसे क्लिप्ट हुए हैं।

 

लाइव हुआ तो दर्द बढ़ा,

बिना सुने हर जुर्म चढ़ा।

एक तरफा रोना धोना,

बन गया है ट्रेंड अब सोना।

 

‘सुट्टा वाली’ या ‘मुक्का प्रकरण’,

हर किस्से का होता है वक्रण।

पहले पक्ष पे सहानुभूति,

बाद में सच दे कटु व्यथा।

 

ताली बजती, लाइक मिलते,

कॉमेंट में फिर न्याय खिलते।

पर जो घर टूटा, वो टूटा,

फॉलोवर्स से न रिश्ता छूटा।

 

कैमरा चालू, अश्रु बहाए,

दूसरी बात कभी न आए।

सोचो यारो, ये क्या मंजर,

प्यार बना अब डिजिटल जंतर।

 

रिश्ते अब ट्रेंडिंग में खोते,

सच्चे लोग भी शक में होते।

हर क्रंदन अब कंटेंट घना,

दर्द भी जैसे पब्लिक बना।

 

इसलिए ठहरो, सोचो सयाने,

हर बात न हो स्टेटस के बहाने।

संवाद रखो, सवाल करो,

दोनों पक्षों का ख्याल करो।

 

वरना इक दिन आएगा ऐसा,

जहाँ प्यार भी होगा पैसा।

रिश्ते बिकेंगे लाइव रो में,

और टूटेंगे वायरल शो में।

-डॉ.सत्यवान सौरभ उब्बा भवन, आर्यनगर,

हिसार (हरियाणा)-127045 (मो.) 7015375570

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *