एक कागज को फाड़ देने से क्या होगा ? – गुरुदीन वर्मा

 

एक कागज को फाड़ देने से क्या होगा, मैंने तो तेरा एक इतिहास लिख दिया है।

एक तस्वीर को तोड़ देने से क्या होगा, मैंने तो तेरा दिल ही चुरा लिया है।।

एक कागज को फाड़ देने से क्या होगा————–।।

 

कितनी नादान हो तुम तो, तुमने पूरा कागज पढ़ा ही नहीं है।

लिखा था राज क्या उसमें, तुमने तो यार वह देखा ही नहीं है।।

कितने पागल हो तुम यार, तुमने उसको समझा ही नहीं है।

एक खत को जला देने से क्या होगा, मैंने तो तेरा एक किस्सा ही बना लिया है।।

एक कागज को फाड़ देने से क्या होगा—————-।।

 

कोई जब यारा दीवाना, किसी को दिल से बहुत चाहता है।

प्यार में होकर पागल वह, बार-बार उसकी तस्वीर बनाता है।।

अब बता तू ही यार, तुमको मैं क्यों खत बार-बार लिखता हूँ।

एक गीत को भूला देने से क्या होगा, मैंने तो तुमको एक सरगम बना लिया है।।

एक कागज को फाड़ देने से क्या होगा—————।।

 

मुझसे ज्यादा तो यहाँ तुमको, कौन इतनी मोहब्बत करेगा।

मानकर तुमको अपना दिल, कौन तेरी इतनी इज्जत करेगा।।

तुमको इतनी खुशियां यार यहाँ पर, किससे मिलेगी।

एक फूल को तोड़ देने से क्या होगा, मैंने तो तुमको एक चमन अपना बना लिया है।

एक कागज को फाड़ देने से क्या होगा————–।।

गुरुदीन वर्मा आज़ाद तहसील एवं जिला- बारां (राजस्थान)

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