उम्मीद कोई ऐसी हमसे, आप अब कभी ना करें।
भूलकर आपके सितम हम, आपसे प्यार करें।।
उम्मीद कोई ऐसी हमसे—————–।।
कब से मुलाकात है अपनी, तुमने हमको क्या दिया।
अपना हमको माना नहीं, प्यार हमको ना दिया।।
करके लहू दान तुमको हम, कुर्बान सब तुमपे करें।
उम्मीद कोई ऐसी हमसे——————।।
मालूम होगा यह तुम्हें भी, हमने यह इजहार किया था।
चाहता है दिल तुम्हें बहुत, वादा दिल ने यह किया था।।
समझा नहीं क्यों तब हमको, ख्याल जो तुम्हारा करें।
उम्मीद कोई ऐसी हमसे—————–।।
और फिर आपका अभिमान, आपके शौक ये हजारों।
हम तो यहाँ है अजनबी, आपके दोस्त हैं हजारों।।
आबाद होना है हमें भी, बर्बादी क्यों अपनी करें।
उम्मीद कोई ऐसी हमसे—————–।।
– गुरुदीन वर्मा आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)
