उम्मीदों की किरण – रोहित आनंद

पूर्व दिशाओं में रंग सुनहरा,

छाई हल्की-सी झंकार ,

उठा धरा का कोना-कोना,

आई भोर लिये उपहार।

 

लाल किरण की चूनर ओढ़े,

आया सूरज मुस्का-मुस्का,

बिखर गई सोई गलियों में,

रोशनी की मीठी फुसफुसा।

 

पंछी बोले ताल मिलाकर —

“जागो, सपनों को मत टालो,”

हवा कहे — “थोड़ा हौसला रख,

खुद पर हर पल विश्वास संभालो।”

 

कल जो बीता, धूल बना वो,

आज नयी राहें ले आई,

हर दिन देता अवसर ताज़ा,

मंज़िल ने भी बाँहें फैलाई।

 

चलो उठो तुम, कदम बढ़ाओ,

मन में हो उजियारा-नीला,

नयी सुबह का गीत यही है —

हर पल जीवन है रंगीला

— रोहित आनंद, बांका,

डी. मेहरपुर, बिहार

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