तम अमावस का मिटाने आ गयी दीपावली।
हर जगह दिखती है रौनक,भा गयी दीपावली।
दर खुला है माँ रफाकत का दिखे हमको बड़ा।
हम करेगे माँ की पूजा आ गयी दीपावली।
अब गरीबों को चले बाँटे पटाखें आज हम।
नूर उनके लब दिखेगा,भा गयी दीपावली।
फूल कुमकुम हम चढ़ाएं आज सारे प्रेम से
भोग मीठा आज देते,ले खुशी दीपावली।
आ गया त्यौहार प्यारा पूजते माँ शारदे।
हम जलाये दीप सारे मन रही दीपावली।
दिख रहा नभ अब अँधेरा रात काली भी लगी।
कर रही है हर दिशा में रोशनी दीपावली। गिरह
छोड़ बाते आज सारी बस दिवाली तू मना।
घर में *रीता भी मनाती हँस के बस दीपावली
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़
