( 1 ) वीर
बहादुर ओ सैनिकों,
अब उठो जागो और ललकारो !
जाओ भेद डालो दुश्मन की छाती..,
सीधे घर में घुसकर, उनको मारो !!
( 2 ) धीर
धरा बहुत बहादुरों,
अब तूफान बन, छा जाओ !
जाओ रक्तरंजित कर दो नापाक धरती.,
तड़पा-तड़पाकर, सिर कलम कर दो !!
( 3 ) क्षीर
पिला माताओं ने,
इसलिए तुम्हें नहीं बड़ा किया !
कि, तुम सब यहाँ पर सोए पड़े रहो…,
और वो आकर दिनदहाड़े तुम्हें मार जाएं !!
( 4 ) नीर
बंद करके दिखलाया,
कि, अब न छोड़ेंगे हम तुम्हें कतई !
जाओ जाकर अपने आकाओं से कह दो.,
पाताललोक में भी जा करेंगे तुम्हारी सफाई !!
( 5 ) पीर
मोहम्मद नाम पर,
तुमने मज़ाक इस्लाम का उड़ाया !
जा छिपते हो धर्म की आड़ में बुज़दिलों..,
अब पाठ पढ़ाके, सीधे जहन्नुम में पहुँचाया जाएगा !!
-सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान
