परेशान हरदम सहारा मिलेना,
बड़ी दर्द होला किनारा मिलेना।
करेजा जराई जियेनी मरेनी,
सबे ज्ञान देला दुबारा मिलेना।
जियेके जतन में हमेशा मरेनी,
जहां जातबानी उबारा मिलेना।
जमाना बुरा सब, लगाये बुझाये,
फिकिर तानतूरे, कछारा मिलेना।
हमेशा तमाशा दिलासा निराशा,
सदा छटपटाई इशारा मिलेना।
इहाँ लोग माहिर खुराफात होला,
इहे रोज चिंता, पसारा मिलेना।
अजब जिंदगी’अनि’, कहेमें डरेनी,
दिया टिमटिमात, अँजोरा मिलेना।
– अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड
