हिंद नव वर्ष – बसंत श्रीवास

महक उठे धरा पर खुशबू ,

और खुशियों की बरसात हो ।

चैत मास के पावन महीना,

नव वर्ष की शुरूआत हो।।

 

सत्य सनातन हो तन-मन में,

तो दुश्मन की क्या औकात हो।

हिंदी नूतन वर्ष की करें स्वागत,

और भाई-चारा की सौगात हो।

 

शीतल मंद सुगंधित हवा,

प्रकृति के कण-कण वास हो।

सुख संपदा हो इस जीवन में,

जब तक तन-मन में सांस हो।।

 

सब से हो मिलना जुलना ,

भाव सहयोग का बनाना है।

नव वर्ष से की नव प्रेरणा से

ये खुशियों का पर्व मनाना है।।

 

जलता रहे मन में दीप नये,

नववर्ष का स्वागत सत्कार हो।

ये जिंदगी तुझे मुबारक़ हो,

ये नया वर्ष नया उपहार हो।।

 

नूतन वर्ष की नव प्रेरणा से,

अब नया अलख जगायेंगे ।

होगी नववर्ष क़ी शुभकामनाएं,

ये विक्रम संवत पर्व मनाएंगे।।

-बसंत श्रीवास वसंत (नरगोड़ा)

रामकृष्ण मिशन नारायणपुर, छत्तीसगढ़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *