वायुपुत्र बजरंग जी, हे अंजनि के लाल।
भक्त शिरोमणि श्रेष्ठ तुम, बने राम के ढाल।।
जन्मदिवस बजरंग का, भरता हृदय उछाह।
त्याग तपस्या धैर्य से, मोड़ें कठिन प्रवाह।।
संकट टालें विपदा हर लें, भक्त शिरोमणि मारुति नन्दन।
नाम सदा जपते सब मन से, करते रहते पूजन वन्दन।
आप कृपा करते भक्तों पर, देते अभय सदा शुभकारी।
लेप करें विग्रह सिंदूरी, शीश लगाते जैसे चंदन।
इच्छा शक्ति बनी रहे, कृपा करें हनुमंत।
निश्चय जिनका है प्रबल, उनके सँग भगवंत।।
मंगल मूरति है प्रभो, दें ऐसा वरदान।
कार्य सभी के सिद्ध हों, बढ़े मान सम्मान।।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
