युवक-हृदय के दीपक तुम हो,
भारत-भू का अभिमान हो,
वेद-विवेक की ज्योति लेकर,
जगे राष्ट्र की पहचान हो।
उठो, जागो—यह मंत्र दिया,
नव-चेतना का प्राण हो,
नर में नारायण देखने का,
अमर तुम्हारा ज्ञान हो।
शक्ति, श्रद्धा, सेवा संग,
जीवन का आधार हो,
निडर वाणी, निर्भीक विचार,
युग-परिवर्तन का सार हो।
शिकागो की वह सिंह-गर्जन,
भारत का जयगान हो,
विश्व-पटल पर गूँज उठा,
सनातन का सम्मान हो।
नमन तुम्हें, हे महापुरुष,
युवा-स्वप्न के प्राण हो,
स्वामी विवेकानंद तुम्हीं,
भारत का उज्ज्वल भान हो।
-रोहित आनंद, बांका , बिहार, डी. मेहरपुर
(12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती)
