यह फागुन मास बहार लगे – अनिरुद्ध कुमार

यह फागुन मास बहार लगे,
हुक प्रेम उठे चितकार लगे।
मन रंग सजा हर नार लगे,
यह बाहर भीतर प्यार लगे।
झकझोर हवा गुलनार लगे,
हर फूल कली कचनार लगे।
यह फागुन मास बहार लगे,………
मन मोहित हो दिलदार लगे,
यह जीवन भी गुलजार लगे।
हर आँख नया करतार लगे,
विहसे चितचोर कटार लगे।
यह यौवन गीत मल्हार लगे,
हर भाव जगे रसधार लगे।
यह फागुन मास बहार लगे,………
रंग लाल बड़ी चटकार लगे,
गुलफाम बनी सरकार लगे।
मनमोहित हो अवतार लगे,
इस जीवन की पतवार लगे।
यह प्रेम भरा उदगार लगे,
मन झूम उठे हरबार लगे।
यह फागुन मास बहार लगे,………
यह मौसम हीं नव धार लगे,
कुछ भी अब ना दरकार लगे।
यह फागुन मास दुलार लगे,
यह पाहुन का सतकार लगे।
हर गाँव गली झनकार लगे।
झट हाँ, पट ना, तकरार लगे।
,यह फागुन मास बहार लगे,………
रँग रंजित जीवन सार लगे,
हर झूमत यौवन यार लगे।
यह यौवन का ललकार लगे,
यह हर दुख से उद्धार लगे।
यह मौसम का रतनार लगे,
मदमस्त आज संसार लगे।
यह फागुन मास बहार लगे,………
– अनिरुद्ध कुमार सिंह
धनबाद, झारखंड

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