प्रातः नमन –
फले ललित यह कामना, सुख बरसे चहुँ ओर,
सिंदूरी सूरज उगे, मंगल मय हो भोर।
पंछी वंदन कर उड़ें, कोयल मंगल गीत।
राम सदा चित में बसें, जीवन हो संगीत।।
प्रेम –
कामना हम सब करें, विश्व का कल्याण हो।
साधना मिलकर करें, प्रेम का अभियान हो।।
स्वार्थ की आंधी न आए, नेह की बरसात हो।
छोड़ कर सब द्वेष सारे, प्रेम की बस बात हो।।
– डॉ क्षमा कौशिक, देहरादून, उत्तराखंड
