भोजपुरी पूर्णिका – श्याम कुंवर भारती

सुने पतझड़ दिल में बन के बहार आ जइता ।

ना ना कईके जान अब त हमार हो जइता ।

 

बेचारा दिल मनाई त मनाई कइसे हम बोला।

पियासल मन के तू बरखा फुहार दे जइता।

 

लागल लगन तोहसे भावे ना केहू तोहरे सिवा।

अटकल जान रूठल ज़िनगी आधार हो जइता ।

 

अब ना अईबा हमके कहा पइबा दुनिया में।

सजा के मांग सजनी अब सिंगार हो जइता ।

 

मोह लिहला मन भारती मोहनी मुस्कान से।

अब ना तड़पाया यार प्यार हमार हो जइता ।

– श्याम कुंवर भारती (राजभर), बोकारो, झारखंड

 

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