रंग बसंती चढ़ा हुआ है, मस्ती में अब झूम।
कर ले अपने सपन सलोने, गली मची है धूम।।
जोगीरा सा रा रा रा रा…..
पग मेरे यूँ बढ़ने लगते, दिखा प्रीति का रंग।
सजना सजनी बजा रहे हैं, अधरों से मृदु चंग।।
जोगीरा सा रा रा रा रा…..
हिय में भरते नेह रूप को,दर्पण दिखता साफ।
दिल मत तोड़ो सजनी का अब, नहीं करेंगी माफ।।
जोगीरा सा रा रा रा रा…..
सप्त रंग में रँगना सजना, मोह पाश हो साज।
चटक लाल रंगों सा जीवन, छिपा हुआ है राज।।
जोगीरा सा रा रा रा रा…..
लाल गुलाबी नीला पीला, रंगों की बौछार।
नेह सुहानी हुई दिवानी,करती नित शृंगार।।
जोगीरा सा रा रा रा रा…..
~कविता बिष्ट ‘नेह’, देहरादून, उत्तराखंड
