कुछ बातें अनकही हैं, फिर भी बड़ी सही हैं,
खामोशियों की राहों में, यादें वहीँ बसी हैं।
नज़रों ने जो कहा था, लफ़्ज़ों ने ना कहा है,
दिल की किताब में वो पंक्तियाँ लिखी हैं।
हल्की सी एक आहट, एहसास जगा देती,
सूनी सी हर घड़ी में धड़कनें बजी हैं।
कह दूँ अगर तो शायद जादू सा टूट जाए,
इसलिए ये बातें अब तक अनकही हैं।
कुछ बातें अनकही हैं, दिल में छुपी कहीं हैं,
होठों तक जो ना आएँ, आँखों में ही बसी हैं।
चुपके से मुस्कुराएँ, फिर आँसू बन भी जाएँ,
ये भावनाएँ मेरी, तुमसे ही तो जुड़ी हैं।
जब पास तुम नहीं हो, यादें संग चलें हैं,
खामोश रात भर में, धड़कनें ही कही हैं।
छूकर हवा भी जाए, एहसास तुम सा लाए,
ये सर्द सी फिज़ाएँ, तुम बिन अधूरी सी हैं।
– वैशाली रस्तोगी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
