काश ! ये न होता
काश ! ऐसा हो जाता
काश ! काश ! काश !
मुझे नहीं लगता
कि कोई ऐसा इंसान भी होगा
जिसकी जिंदगी
इस काश के बिना रही होगी
अनेक पूर्णताओं के मध्य भी
हर किसी की जिंदगी में
कुछ तो अधूरा रह ही जाता है
बहुत कुछ कह देने के बाद भी
कुछ तो अनकहा रह ही जाता है
शायद जिंदगी का यही नियम है.
-मणि अग्रवाल”मणिका”, देहरादून उत्तराखंड
