विद्यावाचस्पति (डॉक्टरेट) की मानद उपाधि से सम्मानित की गयी कवियत्री एवम् साहित्यकारा किरण मिश्रा "स्वयंसिद्धा"

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Vivratidarpan.com नोएडा - विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ गांधीनगर भागलपुर के कुलसचिव डॉ देवेंद्र नाथ साह द्वारा विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ के 18वें दीक्षांत समारोह के कार्यक्रम में कवियत्री किरण मिश्रा "स्वयंसिद्धा" को विद्या वाचस्पति (डाॅक्टरेट ) की मानद उपाधि से नवाजा गया ।

विद्या वाचस्पति की उपाधि डॉक्टरेट के समकक्ष मानी जाती है। यह उपाधि साहित्य के क्षेत्र में बेहतर और उल्लेखनीय कार्यों के लिए दी जाती है। विद्या वाचस्पति की उपाधि मिलने के बाद साहित्यकार या कवि अपने नाम के आगे डॉ.लिखने का पात्र हो जाता है। उल्लेखनीय है कवियत्री किरण मिश्रा  प्रभु श्रीकृष्ण के प्रेम और भक्तिरस में डूबी अद्भुत और विलक्षण कविताओं को काव्य की अनेक विधाओं में रचने में सिद्धहस्त है। यह मानद उपाधि उन्हें हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में  उनकी विभिन्न काव्यकृतियों  के अतुलनीय योगदान और सहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्यों व उपलब्धियों के लिए प्रदान किया गया है।

इनकी हजारों कविताएं देश विदेश के विभिन्न नामचीन पत्र पत्रिकाओं में प्रतिदिन प्रकाशित होती रहती हैं ।

अब तक इनके 50 से अधिक साझा संग्रह साहित्य के विभिन्न विधाओं में प्रकाशित हो चुके हैं वहीं इनकी एकल काव्यकृतियों में "परिणीता प्रेम" और "शुगर फ्री सी जिन्दगी "उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय पुस्तक संग्रहालय तथा उत्तर प्रदेश विधानसभा पुस्तक संग्रहालय लखनऊ में तथा "सुगन्धा" हाइकु संग्रह तथा "मिस यू कान्हा" दोहा और मुक्तक संग्रह राष्ट्रीय पुस्तक संग्रहालय कोलकाता में संग्रहीत की गयी है। तथा विभिन्न साहित्यिक और सामाजिक संस्थायें हिन्दी साहित्य में इनके उत्कृष्ट लेखन के लिए अब तक शतक से भी अधिक सम्मानों से सम्मानित कर चुकी हैं ।