अहसास - ज्योति श्रीवास्तव

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वो   मुझे   अपना  गये  हैं

पल  सभी  महका  गये हैं।

धड़कनों  को  जिंदगी  दे

सांस  को   लौटा   गये हैं।

प्यार  को महसूस  करके

वो  दिखा  सपना  गये हैं ।

खेल बचपन  के सुहाने

दिल को भी बहला गये हैं।

हौसला  जिनके  परों में

आसमां  पर  छा गये हैं ।

बुनके अहसासों में मुझको

प्रेम   को  बतला   गये  हैं।

एक झलक अपनी दिखा के

*ज्योति* बस तड़पा  गये हैं।

ज्योति अरुण श्रीवास्तव, नोएडा, उत्तर प्रदेश