प्रेम भरा उपहार — मधु शुक्ला

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प्रेम भरा उपहार लुभाता, देता खुशी अपार,

मन उपवन में आ जाती है, पाकर उसे बहार।

कीमत भावों की होती है, वस्तु न होती खास।

व्यक्त करे जो अपनेपन को, उर में करे उजास।।

प्रेम  चाहता  नहीं  प्रदर्शन, जाने सब  संसार।

मात्र माँगता प्रेम भरोसा, सम्मानित व्यवहार।।

भेंट  हमें  वह लगती  प्यारी, जो दर्शाये  प्यार,

वह उपहार न लगता अच्छा, धन जिसका आधार।

प्यार जताने के अवसर को, करना मत बेकार,

देना भेंट  हमेशा  वह  जो, बने  प्रीत  आधार।

— मधु शुक्ला ., सतना , मध्यप्रदेश .