ग़ज़ल - ऋतु गुलाटी

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यार  हमको अरे! प्यार सा हो गया।

दिल मेरा आज गुलजार सा हो गया।

ख्याब हमको दिखा चाँद अक्स तुम लगे।

प्यार का मुझको दीदार सा हो गया।

जागते हम रहे रात भर ख्याब में।

नींद आना भी दुश्वार सा हो गया।

सह न पायी जुदाई सनम आपकी।

मन हमारा भी लाचार सा हो गया।

तुम मिले जब से महफिल मे रौनक हुई।

यार मेरा भी भरतार सा हो गया।

- ऋतु गुलाटी, मोहाली, चंडीगढ़