गजल - झरना माथुर

 | 
pic

मुहब्बत से भरे दिल को हिकारत में बदल डाला,

न जाने इश्क को क्यूँ अब  तिजारत में बदल डाला।

चली ये सिरफिरी सी जो हवाये इस ज़माने की,

खुशी को कब किसी ने, उस शहादत में बदल डाला।

निशानी प्यार की जो चांद में दिखती कभी थी वो,

उसे टूटे  सितारे की शख्सियत में  बदल डाला।

कसूर तो कर दिया ये कैफियत जो पूछ ली मैंने,

गमों को अब उसी की ही मुसीबत में बदल डाला।

गुजर जाये सितमगर पास  से अनजान जैसा वो,

तिरी ही खोज ने मुझको ज़िहालत में बदल डाला।

न साजिश वक्त की थी ये न तेरे उन उसूलो की,

जहां ने इन नसीबों को सियासत में बदल डाला।

मुरव्वत मे नज़र मिलते नज़र फेर लेना वो "झरना"

उन्ही की इस अदावत को इबादत में बदल डाला।

- झरना माथुर, देहरादून , उत्तराखंड