टूटते रिश्ते — मधु शुक्ला

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बनें  जो  प्रेम  से रिश्ते,

नहीं   वे   टूटते  रिश्ते।

निभायें  साथ  वे हरदम,

उड़ायें  नेह  का परचम।

गली दिल की जहाँ सकरी,

शिकायत की वहाँ चकरी।

जहाँ  पर  त्याग ममता है,

वहीं  रिश्ता  सँभलता  है।

वहीं  पर   टूटते  रिश्ते,

न अपनापन जहाँ रखते।

जहाँ    संवेदना    गाये,

वहाँ   संबंध    मुस्काये।

बचाओ   टूटते   रिश्ते ,

लगें  अच्छे  सभी हँसते।

न आश्रय स्वार्थ को देना,

खुशी  से  घर सजा लेना।

— मधु शुक्ला , सतना , मध्यप्रदेश