श्री राम यज्ञ- (23 वीं समिधा) - जसवीर सिंह हलधर  

 | 
pic

कवि की भाग्य विधाता अम्बा ।
रिद्धि सिद्धि की दाता अम्बा ।।
राम कथा लिखने की ठानी ।
लिखवा दो यह नेक कहानी ।।1

राजसभा में अंगद बोले ।
वाणी में शब्दों के शोले ।।
तेरे कुल को लगी पनौती ।
देता हूँ अब खुली चुनौती ।।2

सुनी चुनौती जब अंगद की ।
आँख खुली सारी संसद की ।।
अंगद ऐसा संकल्प किया ।
रावण को एक विकल्प दिया ।।3

अंतिम संकल्प सुनाता हूँ ।
धरती पर पैर जामाता हूँ ।।
जो भी यह पैर उठा देगा ।
या इसको तनिक हटा देगा ।।4

तब युद्ध नहीं होगा रण में ।
हम हार मान लेंगे क्षण में ।।
संकल्प सुना जब अंगद का ।
माहौल गरम था संसद का। ।5

सब योद्धा एक एक आये ।
पूरी कोशिश करते पाये ।।
तब मेघनाद उठकर आया ।
वो भी ना पांव उठा पाया ।।6

कुंडलनी शक्ती जागी थी ।
दुर्गा की भक्ती जागी थी ।।
पैरों को जकड़े थे लक्ष्मण ।
जंघा पर बैठे नारायण ।।7

सब सिद्धी समयीं अंगद में ।
कोलाहल सारी संसद में ।।
रावण को क्रोध बहुत आया ।
सिंघासन से उठता पाया ।।8

अंगद ने उसको समझाया ।
नारायण की मुझ पर छाया ।।
मेरे मत पांव पड़ो राजन ।
राघव से नहीं लड़ो राजन ।।9

तुम छिन्न भिन्न हो जाओगे ।
पाया सब कुछ खो जाओगे ।।
किस्मत अपनी मत धुन राजन ।
अंतिम मौका यह सुन राजन ।।10
- जसवीर सिंह हलधर, देहरादून