रोमांचक सफर = डा.अंजु लता सिंह 

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इस प्यारी धरती पर-
सुंदर सा सफर,
जिंदगानी का-
बिता रहे हम मनु-संतान.
सचमुच हैं भाग्यवान...

बीजांकुरित काया-
नेह का साया,
मां की ममता-
पिता की छत्रछाया.
हमारी पहचान...

दुःख-सुख दो किनारे-
पतवार के सहारे,
माझी की नैया में-
बैठे हम सारे.
हथेली पर जान...

बदलते मौसम-
रूके ना सफर,
चलना निरंतर-
बुलाती डगर.
सुनो देकर कान...

हर्ष की हरियाली-
बना दे मदमस्त,
पतझड़ की पीर-
करती है त्रस्त.
समय बलवान...

मार्ग की थकन और-
कटु-तिक्त अनुभव,
संभाले रहें हौसले-
दृढ़ नियम नव.
राही गतिमान...
- डा.अंजु लता सिंह 'प्रियम', दिल्ली